10वीं और 12वीं बोर्ड के नतीजों ने खोली भोपाल की पोल, एक स्कूल में 30 में से 28 छात्र फेल, 12 प्रिंसिपल को नोटिस

Updated on 25-04-2026 11:56 AM

 भोपाल। भोपाल जिले में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के कमजोर परिणाम को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग कार्रवाई करने की तैयारी में है। शुक्रवार को जिला शिक्षा अधिकारी(डीईओ) एनके अहिरवार ने 30 प्रतिशत से कम परिणाम देने वाले स्कूलों के प्राचार्यों की समीक्षा बैठक बुलाई। बैठक में खराब प्रदर्शन के कारणों पर विस्तार से चर्चा की गई और जवाबदेही तय की गई।

बैठक में कई प्राचार्यों ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से नियमित पढ़ाई प्रभावित हुई। शासकीय उमावि छोला के प्राचार्य चक्रेश जैन ने बताया कि उनके स्कूल के लगभग सभी शिक्षक एसआईआर कार्य में व्यस्त थे, जिससे कक्षाएं नियमित नहीं लग पाईं

कुछ अन्य प्राचार्यों ने अतिथि शिक्षकों की गुणवत्ता और उपलब्धता पर भी सवाल उठाए। बैरसिया क्षेत्र के दो स्कूलों के प्राचार्यों ने यह भी कहा कि पहली बार कैमरों की निगरानी में परीक्षा देने से विद्यार्थियों पर मनोविज्ञानी दबाव पड़ा, जिससे उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ। शिक्षा विभाग अब कमजोर स्कूलों पर विशेष फोकस कर रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, नियमित कक्षाएं संचालित करने और निगरानी बढ़ाने से आने वाले वर्षों में परिणाम सुधारने का प्रयास किया जाएगा। बता दें, कि मध्यप्रदेश बोर्ड परीक्षा में इस बार भोपाल जिले का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। 10वीं कक्षा में 67 प्रतिशत परिणाम के साथ जिला 46वें स्थान पर रहा, जबकि 12वीं में 73 प्रतिशत परिणाम के साथ 45वें स्थान पर पहुंच गया।

खराब प्रदर्शन पर सख्ती और नोटिस जारी

डीईओ ने 30 प्रतिशत से कम परिणाम देने वाले 12 स्कूलों के प्राचार्यों को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब मांगा है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि जिन स्कूलों का प्रदर्शन खराब रहा है, वहां पुराने अतिथि शिक्षकों को दोबारा नियुक्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने इन स्कूलों के लिए सुधारात्मक लक्ष्य भी निर्धारित किए हैं।

आंकड़ों में स्थिति चिंताजनक

10वीं कक्षा में 10 स्कूलों का परिणाम 30 प्रतिशत से कम और 20 स्कूलों का 50 प्रतिशत से कम रहा। हालांकि 11 स्कूलों ने 90 प्रतिशत से अधिक और आठ स्कूलों ने 100 प्रतिशत परिणाम भी दर्ज किया। वहीं 12वीं कक्षा में दो स्कूलों का परिणाम 30 प्रतिशत से कम और तीन स्कूलों का 50 प्रतिशत से कम रहा, जबकि कोई भी स्कूल शत-प्रतिशत परिणाम हासिल नहीं कर सका।

कई स्कूलों का परिणाम 13 प्रतिशत से भी कम

राजधानी के छह स्कूलों का प्रदर्शन बेहद खराब रहा, जहां सफलता दर 13 प्रतिशत से भी नीचे रही। ईदगाह हिल्स स्थित परी बाजार स्कूल में 30 में से 28 छात्र फेल हो गए और परिणाम मात्र 6.67 प्रतिशत रहा। इसके अलावा बैरसिया, नजीराबाद, धूटखेड़ी, माजिदगढ़ और जहांगीरिया क्षेत्रों के स्कूलों में भी अधिकांश छात्र असफल रहे।


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