बालेन शाह की भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई की खुली पोल, सुदान गुरुंग को फिर बनाया नेपाल का गृहमंत्री, घिरे

Updated on 10-06-2026 02:50 PM
काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। उन्होंने सुदान गुरुंग को फिर से गृह मंत्री नियुक्त कर दिया है। उनके इस फैसले पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सवाल ये कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों से जन्मे नेता कुछ समय सत्ता में रहने के बाद फिर वही हरकतें शुरू कर देते हैं जो उनके पूर्ववर्ती नेता करते रहते हैं। भारत में भी हम ऐसा देख चुके हैं और इसका असर ये होता है कि लोगों का भरोसा ऐसे आंदोलनों से टूट जाता है और अगले कई वर्ष तक आंदोलन संभव नहीं हो पाता।

बालेन शाह से सिर्फ नेपाल को ही नहीं बल्कि भारत के लोगों को भी बहुत उम्मीदे हैं क्योंकि वो एक आंदोलन के बाद चुनकर आए इसलिए उन्हें कम से कम जनता की उम्मीदों का लिहाज करना चाहिए थे। नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में सुदान गुरुंग को गोपनीयता की शपथ दिलाई। गुरुंग ने 22 अप्रैल को अपने वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी को लेकर उठे विवाद के बाद गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन अब वो फिर से गृह मंत्री बन चुके हैं जबकि उनके खिलाफ जांच रिपोर्ट को प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सार्वजनिक नहीं किया है।

सुदान गुरुंग को गृहमंत्री बनाकर घर में घिरे बालेन शाह

दो महीने से भी कम समय बाद सुदान गुरुंग फिर से अपने पद पर लौट आए जबकि बालेन सरकार ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक भी नहीं की थी। इसके बजाय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सुदान गुरुंग के खिलाफ जांच की सिफारिश कर दी है। आयोग का कहना है कि पिछले साल सितंबर में हुआ Gen Z विरोध प्रदर्शन को सुदान गुरुंग ने ही उकसाकर हिंसक बना दिया था।
सुदान गुरुंग को फिर से गृहमंत्री बनाने के पीछे उस जांच रिपोर्ट का हवाला दिया गया है जिसे पूर्व हाई कोर्ट जज अच्युत प्रसाद भंडारी की अध्यक्षता वाली समिति ने तैयार किया था। रिपोर्ट में कहा गया था 'यह निष्कर्ष निकालने का कोई आधार नहीं है कि संपत्ति का स्रोत संदिग्ध था।' गुरुंग को चुनने से पहले नेपाल सरकार की कैबिनेट ने मंगलवार को ही भंडारी समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करने का फैसला किया था। लेकिन सरकार ने रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया और ना ही इस रिपोर्ट को कब प्रकाशित किया जाएगा इसके बारे में ही कोई जानकारी दी है।प्रधानमंत्री बालेन शाह की प्रेस और जांच विशेषज्ञ दीपा दहल ने कांतिपुर को बताया 'मुझे पता है कि रिपोर्ट शुक्रवार को सौंपी गई थी और वे (गुरुंग) आज (मंगलवार) मंत्री बन गए हैं। मेरे पास कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं है।' संवैधानिक मानवाधिकार निगरानी संस्था के अधिकारियों को अपनी सिफारिशों पर निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है क्योंकि अब जिस व्यक्ति की जांच होनी है वही उस मंत्रालय का प्रमुख है जिसके ऊपर जांच कराने की जिम्मेदारी है। जांच का नेतृत्व करने वाली NHRC सदस्य लिली थापा ने कांतिपुर से कहा 'हम निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे कर सकते हैं जब जिस व्यक्ति के खिलाफ जांच की सिफारिश की गई है वही इसके लिए जिम्मेदार मंत्रालय का नेतृत्व कर रहा हो?'

बालेन शाह भी पुराने प्रधानमंत्रियों जैसे ही निकले!

NHRC सदस्य लिली थापा ने कहा कि नेपाल में यही परंपरा रही है कि जिसके ऊपर जांच होना होता है उसे ही उस विभाग का प्रमुख बना दिया जाता है। उन्होंने कहा कि माओवादी संघर्ष से जुड़े मामलों में भी ऐसा ही पैटर्न देखा गया था। जब आरोपों का सामना कर रहे लोगों को सरकारी पदों पर नियुक्त किया गया तो इससे जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने से रोका गया। उन्होंने कहा 'यह चलन फिर से दोहराया जा सकता है।' इसीलिए सवाल ये है कि क्या बालेन शाह भी पुराने प्रधानमंत्रियों की ही तरह निकले?अप्रैल में गुरुंग पर विवादित कारोबारी दीपक भट्टा के साथ व्यावसायिक संबंध होने के आरोप लगे थे। भट्टा इस समय मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। इसके बाद गुरुंग ने इस्तीफा दे दिया था। 11 मई को कैबिनेट ने पूर्व न्यायाधीश अच्युत प्रसाद भंडारी की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंप दी है। रिपोर्ट में कहा गया कि गुरुंग और दीपक भट्टा के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ और न ही दोनों के बीच किसी वित्तीय लेन-देन का बैंक रिकॉर्ड मिला।समिति के सामने दिए गए बयान में गुरंग ने कहा कि उन्होंने काठमांडू के प्रमुख पर्यटन क्षेत्र ठमेल में एक होटल चलाकर आय अर्जित की थी और बाद में उसी पैसे को शेयरों और सोने में निवेश किया था। समिति ने अपनी जांच में इस स्पष्टीकरण को भी आधार बनाया। समिति के सामने दिए गए बयान में गुरंग ने कहा कि उन्होंने काठमांडू के प्रमुख पर्यटन क्षेत्र ठमेल में एक होटल चलाकर आय अर्जित की थी और बाद में उसी पैसे को शेयरों और सोने में निवेश किया था। समिति ने अपनी जांच में इस स्पष्टीकरण को भी आधार बनाया।

सुदान गुरंग की संपत्ति पर क्यों उठ रहे सवाल?

12 अप्रैल को जब प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह और अन्य मंत्रियों ने अपनी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक किया तब गुरुंग मंत्रिमंडल के सबसे अमीर सदस्यों में से एक पाए गए। उनके पास बड़ी मात्रा में नकद जमा, कई कंपनियों के शेयर और काफी जमीन-जायदाद होने की जानकारी सामने आई जो कानूनी सीमा से भी अधिक थी। जब उनकी संपत्ति को लेकर सवाल उठे, तो गुरुंग ने सोशल मीडिया पर अपना बचाव करते हुए लिखा कि गरीब पैदा होना किसी की गलती नहीं है लेकिन गरीब मरना उसकी अपनी गलती है। लेकिन बालेन सरकार ने जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है। इसीलिए उनपर सवाल उठ रहे हैं।

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