भारत आएगा विलायती सामान लेकिन अभी कम नहीं होंगे दाम! जान लीजिए वजह
Updated on
21-07-2026 01:26 PM
नई दिल्ली: भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते (CETA) से भारतीय बाजारों की रौनक बढ़ने वाली है। अब आम ग्राहकों के पास बाजारों में सामान चुनने के लिए और भी ज्यादा विकल्प होंगे। कई नए ब्रिटिश ब्रैंड भारतीय बाजार में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए शुरुआती बातचीत भी शुरू हो चुकी है। लेकिन, इस समझौते का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि ग्राहकों को तुरंत हर चीज सस्ती मिलने लगेगी।
- क्या है चुनौती?
पाउंड के मुकाबले रुपये की कीमत गिरने से विदेश से सामान मंगाना महंगा हो गया है। ऐसे में कंपनियों के लिए टैक्स में मिली छूट का पूरा फायदा ग्राहकों तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। हालांकि,रुपये की कमजोरी और युद्ध की वजह से जो कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ सकती थीं, यह समझौता उन्हें रोकने में एक ढाल का काम करेगा। - क्या होगा फायदा?
उदाहरण के लिए, ब्रिटिश कॉस्मेटिक ब्रैंड Lush ने भारत में अपनी कीमतें बढ़ाने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। भारत में कंपनी के पार्टनर बिलबेरी ब्रैंड्स के सीईओ विशाल आनंद ने बताया कि वे उन कैटिगरी में दाम कम करेंगे जहां टैक्स में सबसे ज्यादा छूट मिली है। जैसे शॉवर जेल और साबुन। - क्या है मुश्किल?
हालांकि, हर प्रोडक्ट के दाम कम करना मुमकिन नहीं होगा, क्योंकि रुपये के गिरने से जो नुकसान हुआ है, वह टैक्स में मिली छूट से कहीं ज्यादा है। आनंद के मुताबिक, लंबी अवधि में जब टैक्स धीरे-धीरे और कम होगा, तब ग्राहकों को कम कीमतों का फायदा मिल सकेगा। पिछले एक साल में पाउंड के मुकाबले रुपया करीब 12% तक कमजोर हुआ है। - युद्ध का कितना असर?
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से सामान की सप्लाई में दिक्कत आ रही है। इसमें समय भी ज्यादा लग रहा है। इसकी वजह से कंपनियों को समुद्री रास्ते के बजाय महंगे हवाई रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे लागत बढ़ गई है। Kindlife की सीईओ राधिका घई का कहना है कि टैक्स कटने से कंपनियों को थोड़ी राहत तो मिली है, लेकिन रुपये के उतार-चढ़ाव और बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत को देखते हुए किसी को भी रातों-रात एमआरपी गिरने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। - कंपनियों का कहना है?
Kindlife फिलहाल स्किनकेयर और वेलनेस से जुड़े 12 ब्रिटिश ब्रैंड्स के साथ काम कर रही है। ये ब्रैंड अगले 6 से 9 महीनों में भारत में लॉन्च हो सकते हैं। इनमें से ज्यादातर ब्रैंड 700 रुपये से 1,500 रुपये की कीमत के बीच अपना बाजार देख रहे हैं। घई के मुताबिक, अब विदेशी ब्रैंड्स का सवाल यह नहीं है कि 'क्या हमें भारत जाना चाहिए?।' बल्कि वे यह पूछ रहे हैं कि 'हम भारत में अपने कदम कैसे जमाएं?' Ethos के एमडी प्रणव साबू का कहना है कि कई ब्रिटिश वॉच ब्रैंड अब भारत आने में दिलचस्पी दिखाएंगे।