इजरायल भारत के लिए फिर बना संकटमोचक! वायुसेना के लिए बनाएगा 6 'हवाई पेट्रोल पंप'

Updated on 07-05-2026 11:37 AM
तेल अवीव/नई दिल्ली: भारत इजरायल के साथ आसमान में ही लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने के लिए 6 एयरक्राफ्ट कन्वर्ट करने जा रहा है। डिफेंस न्यूज़ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL) ने इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ (IAI) के साथ छह बोइंग 767 विमानों को टैंकर ट्रांसपोर्ट विमानों में बदलने के लिए एक डील पक्की कर ली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने छह बोइंग 767 विमानों को टैंकर ट्रांसपोर्ट विमानों में बदलने के लिए 900 मिलियन डॉलर से 1.1 अरब डॉलर की एक डील पक्की कर ली है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अब तक भारतीय वायु सेना पुराने Ilyushin 78 विमानों पर निर्भर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक IAI और HAL की तरफ से बोइंग 767 विमानों को बदलने के विकल्प को दो टैंकरों - Airbus A330 MRTT और Boeing KC 46 की खरीद पर प्राथमिकता दी गई। इसके पीछे की मुख्य वजह ये है कि ये भारत के मेक इन इंडिया के मुताबिक है। जिसमें इजरायली कंपनियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। ईरान युद्ध के दौरान ऐसे एयरक्राफ्ट काफी काम आए हैं जब अमेरिका और इजरायली विमानों ने हवा में ही ईंधन भरकर लगातार अपने मिशन को जारी रखा।

इजरायल से 6 टैंकर एयरक्राफ्ट खरीदेगा भारत

मार्च 2024 में IAI ने नई दिल्ली में अपनी भारतीय सहायक कंपनी एयरोस्पेस सर्विसेज इंडिया (ASI) लॉन्च की थी। इस कंपनी की स्थापना IAI और DRDO (भारत सरकार की रक्षा R&D एजेंसी, जो इजरायल की MAFAT के समकक्ष है) के बीच एक सहयोग के हिस्से के रूप में की गई थी। इसका मकसद भारतीय सेना के लिए निर्मित उत्पादों को विकसित और उनका अपग्रेडेशन करना था। ASI में 50 कर्मचारी हैं जिनमें से 97% भारतीय नागरिक हैं। कंपनी के कार्यालय नई दिल्ली में हैं लेकिन कंपनी की शाखाएं पूरे भारत में फैली हुई हैं।खास बात ये है कि ASI रुपयों में सौदे करती है और यह एकमात्र ऐसी कंपनी है जो मीडियम रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (MRSAM) का कारोबार करती है। यह एक एडवांस और आधुनिक सिस्टम है जो हवा से होने वाले कई तरह के खतरों से सुरक्षा देता है और इसका इस्तेमाल भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना करती हैं। इस सिस्टम में एक फेज़्ड ऐरे रडार, एक कमांड और कंट्रोल सिस्टम, मोबाइल लॉन्चर और इंटरसेप्टर शामिल हैं। MRSAM सिस्टम को भारतीय सशस्त्र बलों के लिए IAI और DRDO के सहयोग से विकसित किया गया था।

पैसेंजर प्लेन को किया जाएगा टैंकर एयरक्राफ्ट में कन्वर्ट

IAI एयरक्राफ्ट कन्वर्ज़न में एक ग्लोबल लीडर है और ये ज्यादातर कारोबारी मकसदों के लिए होता है जिसमें पैसेंजर विमानों को कार्गो प्लेन में बदला जाता है। इस इजरायली कंपनी ने पिछले साल सितंबर में घोषणा की थी कि उसने एक बोइंग 777 को पैसेंजर से कार्गो कॉन्फ़िगरेशन में बदलने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। दरअसल पैसेंजर एयरक्राफ्ट लगभग 15 साल तक चलने के बाद सीटों और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, दोनों ही मामलों में पुराने हो जाते हैं। कार्गो एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरर से खरीदे जा सकते हैं लेकिन कन्वर्ज़न की लागत नए एयरक्राफ्ट की कीमत से लगभग 20% कम होती है। अगर कन्वर्ज़न तब किया जाता है जब एयरक्राफ्ट 15 साल पुराना हो तो इसे कार्गो एयरक्राफ्ट के तौर पर लगभग 50 और सालों तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

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