भोपाल । अपराधों की जांच के लिए करोड़ों रुपये की मोबाइल फोरेंसिक वैन खरीद ली गईं, लेकिन इन्हें चलाने वालों की नियुक्ति में ऐसी सुस्ती बरती गई कि संसाधन हाथ में होने के बावजूद व्यवस्था उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रही।वर्ष 2024 में वैन की जरूरत के साथ विज्ञानिक अधिकारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव भी दिया गया था।
दो साल सुस्त पड़ी प्रक्रिया
प्रदेश में भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ने में करीब दो साल लग गए। अब इस साल नवंबर में परीक्षा प्रस्तावित है। इसके बाद परिणाम, साक्षात्कार, दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति आदेश की प्रक्रिया पूरी होने में समय लगेगा।
ऐसे में पहला बैच मिलने तक तक वैन में मौजूद महंगे उपकरणों की वारंटी और जांच किट के रसायनों की उपयोग अवधि खत्म हो जाएगी। यानी विज्ञानिक जांच के लिए खरीदे गए संसाधन इस्तेमाल होने से पहले ही अपनी उपयोगिता खोने की स्थिति में पहुंच जाएंगे।
231 पुलिस अनुविभागों में पहुंचना है वाहन
प्रदेश के 231 पुलिस अनुविभागों में मोबाइल फोरेंसिक वैन पहुंचाने की योजना थी। सात साल या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में घटनास्थल पर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए 200 से अधिक विज्ञानी अधिकारियों की जरूरत बताई गई थी।
इसके बावजूद भर्ती और वैन की उपलब्धता को एक साथ आगे बढ़ाने के बजाय पदों को तीन चरणों में भरने का निर्णय लिया गया।
पहले चरण में 81 पदों की भर्ती का विज्ञापन जारी हुआ। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय से मिलीं 57 वैन में से केवल 28 का ही 19 जिलों में इस्तेमाल हो पा रहा है।
बाकी वैन लंबे समय तक मुख्यालय में खड़ी रहीं और अब जिलों में भेजे जाने के बाद भी पर्याप्त विज्ञानी अधिकारियों के अभाव में उनका पूरा उपयोग नहीं हो रहा है।
भर्ती की सुस्ती से सरकारी निवेश पर दोहरी मार
उपकरणों की वारंटी निकलने, रसायनों की उपयोग अवधि समाप्त होने और रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च की नौबत आने से शासन को दोहरी आर्थिक चोट लगेगी। एक ओर करोड़ों रुपये के वाहन खड़े रहेंगे, दूसरी ओर उन्हें दोबारा उपयोग योग्य बनाए रखने के लिए सरकारी खजाने से अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ सकती है।
140 अधिकारियों का इंतजार भी बाकी
पहले चरण के 81 पदों की भर्ती में ही समय लगने की आशंका है, जबकि करीब 140 अन्य पदों को दो चरण में भरना बाकी है। इसी गति से भर्ती चली तो प्रदेश के सभी 231 अनुविभागों में विज्ञानिक जांच का नेटवर्क तैयार होने में लंबा समय लगेगा।
मध्य प्रदेश शासन के हिस्से की 174 वैन की उपलब्धता भी अभी बाकी है। इस तरह वाहन खरीदी, अधिकारियों की नियुक्ति और जिलों में तैनाती के बीच तालमेल न होने का सीधा असर बीएनएस में न्याय की अवधारणा पर पड़ रहा है।
संविदा नियुक्ति के विकल्प पर अमल नहीं
एफएसएल अधिकारियों के अनुसार विज्ञानी अधिकारियों की कमी दूर करने के लिए संविदा पर नियुक्ति का विकल्प भी सुझाया गया था, लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका। मानव संसाधन की कमी पहले से स्पष्ट थी, फिर भी समय रहते उसका समाधान नहीं निकाला गया।
अब करोड़ों के संसाधनों को उपयोग में लाने के बजाय उनके रखरखाव और उपयोगिता बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।