
दुर्ग, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी "Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India" स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में न्यायालयीन वादों की संख्या में कमी लाते हुए स्थानीय स्तर पर आपसी संवाद एवं सहमति के माध्यम से विवादों का शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना है।
जिसके संबंध में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग एवं जिला प्रशासन, दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में आज ग्राम कुथरेल में सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम के अंतर्गत एक भव्य एवं प्रभावी विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विभिन्न विभागों के समन्वित सहयोग एवं जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।
उक्त कार्यक्रम का आयोजन राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पशु चिकित्सा विभाग सहित अन्य विभागीय प्रशासनिक अधिकारियों के समन्वय एवं सक्रिय सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जिला दुर्ग स्थित भारती लॉ कॉलेज के प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थीगण की गरिमामयी एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता भी रही, जिन्होंने सामुदायिक मध्यस्थता एवं विधिक जागरूकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कार्यक्रम को और अधिक सार्थक एवं प्रभावी बनाया। विधि के विद्यार्थियों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि न्याय एवं सामाजिक समरसता के मूल्यों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने में युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य नागरिकों के मध्य इस महत्वपूर्ण जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार करना था कि किसी भी प्रकार के छोटे-बड़े सामाजिक, पारिवारिक अथवा सामुदायिक विवादों का समाधान केवल न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव नहीं है, बल्कि उन्हें आपसी संवाद, समझ, सहमति एवं सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से भी सौहार्दपूर्ण एवं सम्मानजनक ढंग से सुलझाया जा सकता है। सामुदायिक मध्यस्थता ऐसी प्रभावी प्रक्रिया है, जिसमें किसी भी पक्ष की हार अथवा जीत नहीं होती, बल्कि दोनों पक्षों की भावनाओं, आवश्यकताओं एवं हितों का सम्मान करते हुए ऐसा समाधान खोजा जाता है, जिसे सभी पक्ष स्वेच्छा एवं संतोषपूर्वक स्वीकार कर सकें।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा अपने-अपने विभागों से संबंधित जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी प्रदान करते हुए ग्रामीणजनों को विधिक अधिकारों, सामाजिक उत्तरदायित्वों एवं शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में जागरूक किया गया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के मध्य समन्वित कार्यप्रणाली एवं जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।
उक्त कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बी.एम.ओ. देवेन्द्र बेलचंदन, महिला एवं बाल विकास विभाग से सुपरवाइजर ममता साहू, जनपद पंचायत से परियोजना अधिकारी (पी.ओ.) गौरव मिश्रा, राजस्व विभाग से पटवारी सतीश दीवान, पशु चिकित्सा विभाग से प्रेमलता देवांगन तथा भारती लॉ कॉलेज से असिस्टेंट प्रोफेसर संपदा बैस एवं सरिता गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर का विशेष योगदान रहा, जिनके समन्वय एवं मार्गदर्शन में विभिन्न विभागों के मध्य प्रभावी सहभागिता सुनिश्चित करते हुए कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। उनके द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता एवं विधिक जागरूकता के व्यापक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से किए गए प्रयासों ने कार्यक्रम को और अधिक सार्थक एवं जनोपयोगी बनाया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग एवं जिला प्रशासन, दुर्ग द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम विभिन्न विभागों के समन्वित सहयोग, शैक्षणिक संस्थानों की सहभागिता एवं जनसहभागिता के माध्यम से सामाजिक सौहार्द, विधिक जागरूकता एवं वैकल्पिक विवाद समाधान की संस्कृति को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण, प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय पहल सिद्ध हुआ। सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से समाज में संवाद, सहयोग एवं आपसी विश्वास की भावना को सशक्त बनाने का यह प्रयास निश्चित रूप से न्याय सुलभता के लक्ष्य को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।