ट्रंप के इजरायल दांव ने पाकिस्तान को फंसा दिया, जिसे जिन्ना ने बताया मुस्लिम दुनिया के सीने में खंजर, उस पर मुनीर से बड़ी मांग

Updated on 12-06-2026 12:40 PM
शैलेंद्र पांडेय: फील्ड मार्शल असीम मुनीर की जोड़ी ने वाइट हाउस में ऐसी साख हासिल कर ली है कि डॉनल्ड ट्रंप के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए वे कुछ भी कर सकते हैं। इसके बाद भी पिछले दिनों ट्रंप ने जो मांगा, उसने इन दोनों को सुन्न कर दिया। इजरायल को मान्यता ...! जिस देश को मोहम्मद अली जिन्ना ने मुस्लिम दुनिया के सीने में खंजर बताया था, उसके साथ दोस्ती के बारे में पाकिस्तान में कोई सोच भी नहीं सकता। सेना का वह जनरल भी नहीं, जिसके लिए संविधान बदल दिया गया।


बॉस की ख्वाहिश

खैर, ट्रंप के सोचने के अपने तरीके हैं। दुनिया और उसमें भी पश्चिम व दक्षिण एशिया को लेकर उनकी जो समझ है, उसके हिसाब से उन्होंने वही किया, जो ठीक लगा। ईरान के साथ समझौता टलता जा रहा है और तीन महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी उनके हाथ में कुछ है नहीं। उन्हें बस यह जंग नहीं जीतनी, इतिहास रचना है।

ट्रंप का पुराना एजेंडा

अपने पहले कार्यकाल में, साल 2020 में इजरायल के साथ मुस्लिम देशों के कूटनीतिक संबंध बहाल करने के लिए वह अब्राहम एकॉर्ड लेकर आए थे। तब बहरीन, UAE और मोरक्को इसका हिस्सा बने। इसका एक फायदा यह हुआ कि इन देशों में इजरायली निवेश बढ़ा। ट्रंप इसके लिए दबाव बना रहे हैं, ताकि इजरायल की स्वीकार्यता बढ़े। ईरान इससे अलग-थलग पड़ेगा और अमेरिका का इलाके में दबदबा बढ़ेगा। हालांकि लगे हाथ उन्होंने यह इच्छा भी जता ही दी थी कि शांति समझौते के बाद तेहरान को भी इस एकॉर्ड में शामिल होने के लिए कहा जाएगा।

पाकिस्तान में बेचैनी

अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाम सऊदी अरब और कतर का भी लिया, लेकिन हंगामा सबसे ज्यादा मचा पाकिस्तान में। इस्लामाबाद को इस्लामिक देशों के स्वघोषित नेता की अपनी छवि पर यह आघात जैसा लगा, और कई विशेषज्ञों को ट्रंप की जुर्रत व बदगुमानी। आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने तो सीधे-सीधे धमकी दे दी कि अगर किसी ने भी, यानी शीर्ष नेता और उच्च सैन्य अधिकारी ने भी, इस बारे में सोचा तक तो उसे खत्म कर दिया जाएगा।

बंद रास्ते

यहूदी, ईसाई और इस्लाम- तीनों धर्मो में आस्था के बहुत बड़े प्रतीक है पैगंबर अब्राहम। उनके नाम को एक प्रतीक के रूप में चुना गया, कि शायद इससे सहयोग के नए रास्ते खुलें। लेकिन, इतिहास की रंजिशें सब पर भारी हैं। और पाकिस्तान से ट्रंप ने जो यह ख्वाहिश की, उसके पीछे भी इतिहास ही है

ब्रिटेन का डर

ईरान युद्ध में मध्यस्थ बना पाकिस्तान आज अगर फंसा महसूस कर रहा, तो इसकी वजह एक पुराना खेल है, द ग्रेट गेम। यह खेल तब शुरू हुआ, जब पाकिस्तान था भी नहीं। 19वीं सदी में ब्रिटिश और सोवियत साम्राज्य कोशिश कर रहे थे मध्य एशिया वअफगानिस्तान पर प्रभाव जमाने की। ब्रिटेन को डर था कि अफगानिस्तान से होकर रूस कहीं भारत तक न पहुंच जाए। तब उसने उत्तर-पश्चिमी इलाकों में एक विशेष फ्रंटियर पॉलिसी बनाई।

पाकिस्तान का फायदा

ब्रिटिश साम्राज्य ने जो फ्रंट खींचा था, उसका एक बड़ा हिस्सा बंटवारे के बाद आया पाकिस्तान में। नए-नए बने पाकिस्तान के पास न पैसा था और न संसाधन। और जब मुस्लिम शरणार्थियों की भीड़ घुसने लगी तो लगा कि जमीन भी कम पड़ जाएगी। पाकिस्तान के हुक्मरानों को लेकिन शुरू से यह अहसास था कि उनके मुल्क की भू-राजनीतिक स्थिति उन्हें डूबने नहीं देगी कभी।

लगातार जरूरत

किस्मत ही कहिए कि शीत युद्ध में अमेरिका को फिर पाकिस्तान की जरूरत पड़ गई। ग्रेट गेम के इस हिस्से में इस्लामाबाद SEATO और CENTO जैसे अमेरिकी गठबंधनों का हिस्सा बना। इन्हें बनाया गया था सोवियत संघ और साम्यवाद के विस्तार को रोकने के लिए। बदले में पाकिस्तान को मिली सैन्य और आर्थिक इमदाद। यह खेल और मदद तब भी जारी रहे, जब 9/11 का बदला लेने के लिए अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला बोला।

दोहरी चाल

दक्षिण-मध्य पूर्व और मध्य एशिया के संगम पर होने व अरब सागर तक सीधी पहुंच के चलते पाकिस्तान हमेशा महाशक्तियों के काम का रहा है। इसी के चलते उसकी कई खताएं भी माफ हुई। वह लादेन को खोजने के लिए डॉलर लेता रहा और उसे अपने यहां छिपाए रखा, चीन को आर्थिक गलियारा दिया और अमेरिका को वे खदानें, जिनका अभी पता लगाया जाना है।

खेल के जोखिम

लेकिन, द ग्रेट गेम के साथ जोखिम यही है कि यह कभी भी बदल सकता है, देने वाले कुछ भी मांग सकते हैं। ट्रंप ने यही किया है। वह खेल को हमेशा के लिए बदलना चाहते हैं। उन्हें रूस, चीन, ईरान - सभी को चित्त करना है। पाकिस्तान को वह फिर मोहरा बनाना चाहते हैं। और पाकिस्तान इस उम्मीद में है कि पिछले सारे खेलों की तरह वह फिर सभी को गच्चा देकर निकल जाएगा।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 28 July 2026
टोक्यो: जापान में 7.1 की तीव्रता से भूकंप के झटके महसूस किए गये हैं जिसके बाद सुनामी का अलर्ट जारी कर दिया गया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया…
 28 July 2026
काठमांडू: नेपाल ने भारत से अनुरोध किया है कि वह नेपाली नागरिकों के बॉयोमेट्रिक राष्ट्रीय पहचान पत्र (Natioanl Identity Card) को यात्रा दस्तावेज के रूप में मान्यता दे। राजनयिक चैनलों…
 28 July 2026
तेहरान: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले का ईरान का दांव कामयाब होता दिख रहा है। पिछले तीन दिनों के मैरीटाइम डेटा से पता चलता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से…
 28 July 2026
काठमांडू: नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष रबी लामिछाने अगस्त में चीन का दौरा कर सकते हैं। उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) ने आमंत्रित किया है और…
 27 July 2026
इस्लामाबाद: बलोच नेता मीर यार ने एक बार फिर भारत से रिश्ते पर जोर दिया है और पाकिस्तान से आजादी की बात कही है। मीर यार ने भारत को सदियों…
 27 July 2026
बीजिंग: चीन पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही भारतीय विमानों को लेकर प्रोपेगैंडा फैला रहा है। चीनी मीडिया पिछले एक सवा साल से लगातार अपने रक्षा उपकरणों जैसे…
 27 July 2026
इस्लामाबाद: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को पाकिस्तान को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि कश्मीर मुद्दे से जुड़े किसी विवाद पर बात होगी तो वह पाकिस्तान के…
 27 July 2026
ढाका: बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार उज जमां ने बीते हफ्ते पांच दिन का तुर्की का दौरा किया है। वह दौरा खत्म कर शनिवार, 25 जुलाई को ढाका लौटे…
 27 July 2026
लंदन: स्वीडन की एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने दिल्ली में मजबूती से विरोध प्रदर्शन करने के लिए भारतीय छात्रों की तारीफ की है। लंदन के ट्रैफलगर स्क्वायर पर एसएफआई की रैली…
Advt.