UNSC में भारत की दावेदारी का पाकिस्तान, तुर्की और इटली क्यों कर रहे विरोध? वीटो पावर के भी खिलाफ कॉफी क्लब

Updated on 26-09-2026 12:07 PM
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को लेकर चल रही जोरदार मांग के बीच पाकिस्तान, तुर्की और इटली वाले समूह ने इसका विरोध किया है। 12 सदस्यों वाले 'यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस' समूह ने सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटें बढ़ाने का विरोध दोहराया है। कॉफी क्लब कहे जाने वाले इस समूह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें अधिवेशन के दौरान बयान जारी किया है। यह विरोध ऐसे समय में हुआ है, जब भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए मजबूती से मांग रख रहा है।

UNSC में नई सीट बनाने का विरोध

यूनाइटिंग फॉर कंसेसस समूह ने गुरुवार को एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें नई सीटें बनाने को लेकर विरोध दोहराया। समूह ने नई स्थायी सीटें बनाने के बजाय चुने हुए सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। संयुक्त बयान में कहा गया कि इसका लक्ष्य एक ऐसी परिषद के लिए काम करना है जो ज्यादा प्रतिनिधित्व वाली, लोकतांत्रिक, पारदर्शी, जवाबदेह और असरदार हो। इसने कहा कि चुनी हुई सदस्यता बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिलेगी और साथ ही संप्रभु समानता का सिद्धांत भी बना रहेगा।

क्या है कॉफी क्लब?

12 देशों वाले इस समूह में पाकिस्तान, इटली, तुर्की, दक्षिण कोरिया, स्पेन, अर्जेंटीना, कनाडा, कोलंबिया, कोस्टारिका, माल्टा, मेक्सिको और सैन मैरिनो शामिल हैं। यह समूह उन देशों का क्लब है जो संयुक्त राष्ट्र में भारत जैसे देशों के एजेंडे का विरोध करते हैं, जो स्थायी सदस्यता बढ़ाए जाने के समर्थन में हैं। इस समूह के विरोध के चलते ही संयुक्त में सुधारों पर IGN में टेक्स्ट आधारित बातचीत पर सहमति नहीं बन पाई है।

वीटो पावर को खत्म करने की मांग

यह समूह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो पावर का भी विरोध करता है और इसे खत्म किए जाने की मांग करता है। ताजा बयान में भी यह मुद्दा दोहराया गया है। ग्रुप ने कहा कि वह वीटो को खत्म करने का समर्थन करता है। साथ ही खास हालात में इसके इस्तेमाल को सीमित करने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की। इसने कहा कि हमें खास हालात में इसे सीमित करने की दिशा में तुरंत मिलकर काम करना चाहिए, जिसमें बड़े पैमाने पर अत्याचार और युद्ध अपराध जैसे मामले शामिल हैं।
हाल ही में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने अमेरिकी मीडिया में लेख लिखकर वीटो पावर खत्म करने की मांग की थी। ब्लूमबर्ग में लिखे लेख में एर्दोगन ने एक कदम आगे बढ़ते हुए स्थायी सदस्यों को पूरी तरह से चुनकर लाने का प्रस्ताव दिया था। एर्दोगन ने कहा था कि पांच देश दुनिया का प्रतिनिधित्व नहीं करते। उन्होंने सुरक्षा परिषद के सदस्यों को एक निश्चित समय के लिए चुनकर लाने की मांग की और दोबारा कार्यकाल के लिए फिर से चुनाव का सुझाव दिया था।

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