न्यूजीलैंड में आम चुनाव के लिए वोटिंग खत्म हो गई है। अल जजीरा के मुताबिक, शुरुआती नतीजों में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की सत्ताधारी नेशनल पार्टी को 31.19% वोट मिले हैं। वहीं, विपक्षी लेबर पार्टी 28.35% वोटों के साथ दूसरे नंबर पर है।
चुनाव आयोग शनिवार रात तक 95% पोलिंग स्टेशनों के शुरुआती नतीजे जारी करेगा। विदेश में रहने वाले न्यूजीलैंड के नागरिकों के वोटों की गिनती के बाद 27 नवंबर को अंतिम नतीजे आने की उम्मीद है।
इस चुनाव में महंगाई, बेरोजगारी और कमजोर अर्थव्यवस्था बड़े मुद्दे रहे। न्यूजीलैंड की संसद में कुल 120 सीटें हैं और बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। शुरुआती रुझानों में किसी भी प्रमुख दल को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। ऐसे में छोटी पार्टियों तय कर सकती हैं कि अगली सरकार किसकी बनेगी।
कौन हैं प्रधानमंत्री पद के दो बड़े दावेदार?
क्रिस्टोफर लक्सन
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन दूसरी बार सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने 2023 के चुनाव में सेंटर-राइट नेशनल पार्टी को जीत दिलाई थी। इससे देश में 6 साल से चल रही लेबर पार्टी की सरकार खत्म हो गई थी।
हालांकि, प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही उन्हें राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस साल अप्रैल और अगस्त में उनकी अपनी पार्टी के सांसदों ने उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए और उन्हें हटाने की कोशिश की।
दोनों बार लक्सन अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे। अगस्त में हुई दूसरी कोशिश के पीछे उस समय के रक्षा मंत्री का हाथ होने की खबरें भी आई थीं।
उनकी सरकार को अर्थव्यवस्था में धीमी सुधार और गठबंधन में शामिल पार्टियों के बीच मतभेदों को लेकर भी आलोचना झेलनी पड़ी है।
क्रिस हिपकिंस
विपक्षी लेबर पार्टी के नेता क्रिस हिपकिंस फिर से प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। 2023 के चुनाव में उनकी पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। हिपकिंस पहली बार 2008 में सांसद बने थे।
जनवरी 2023 में जैसिंडा अर्डर्न के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली थी।
हालांकि, उनका कार्यकाल सिर्फ नौ महीने चला। अक्टूबर 2023 के चुनाव में लक्सन की नेशनल पार्टी के गठबंधन ने जीत हासिल की और लेबर पार्टी सत्ता से बाहर हो गई।
हार के बाद भी हिपकिंस पार्टी के नेता बने रहे। इस बार वे महंगाई से राहत देने और सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने का वादा कर रहे हैं।
चुनाव में कौन से मुद्दे सबसे अहम हैं?
1. अर्थव्यवस्था और महंगाई: इस चुनाव में अर्थव्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा है। दोनों प्रमुख पार्टियां आर्थिक विकास बढ़ाने और लोगों को महंगाई से राहत देने की बात कर रही हैं, लेकिन उनके तरीके अलग हैं।
नेशनल पार्टी सरकारी खर्च पर नियंत्रण रखकर बजट को फिर से फायदे में लाना चाहती है। इसके साथ ही राष्ट्रीय पेंशन योजना का विस्तार करने का वादा किया गया है।
वहीं, लेबर पार्टी लोगों के घरेलू खर्च को कम करने पर जोर दे रही है। पार्टी सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं और परिवहन सुविधा देने के साथ मकान, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर निवेश बढ़ाना चाहती है।
2. बिजली, किराना और टैक्स: छोटी पार्टियां बिजली और किराने के सामान की बढ़ती कीमतों को लेकर बड़े बदलाव का वादा कर रही हैं।
न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी बड़ी बिजली कंपनियों को बांटने और देश की बड़ी सुपरमार्केट कंपनियों में से एक को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की बात कर रही है।
वहीं, ग्रीन पार्टी सरकारी बिजली कंपनी और सरकारी सुपरमार्केट चेन बनाने का प्रस्ताव दे रही है। पार्टी किराने के सामान की कीमतों पर सख्त नियंत्रण चाहती है।
ग्रीन पार्टी अमीर लोगों, बड़ी कंपनियों और बैंकों पर ज्यादा टैक्स लगाने के पक्ष में है। साथ ही ज्यादातर लोगों का इनकम टैक्स कम करने का वादा कर रही है। दूसरी ओर, अपॉर्च्युनिटी पार्टी जमीन की कीमत के आधार पर टैक्स लगाने की बात कर रही है।
3. इमिग्रेशन और वोट देने का अधिकार: चुनाव में विदेशियों के रहने के नियम और वोट देने का अधिकार भी बड़े मुद्दे बने हुए हैं।
ACT पार्टी गंभीर अपराध करने वाले लोगों को न्यूजीलैंड से बाहर भेजने के पक्ष में है। पार्टी का कहना है कि उन्होंने देश में कितने भी साल बिताए हों, उन्हें वापस भेजा जाना चाहिए।
न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी वोट देने का अधिकार सिर्फ देश के नागरिकों तक सीमित करना चाहती है। फिलहाल न्यूजीलैंड में रहने वाले योग्य स्थायी निवासी भी वोट दे सकते हैं, बशर्ते वे लगातार कम से कम 12 महीने से देश में रह रहे हों। इस प्रस्ताव से मौजूदा चुनावी नियम बदल जाएंगे।
हर तीन साल में होते हैं आम चुनाव
न्यूजीलैंड में हर तीन साल में आम चुनाव होते हैं। यहां मिक्स्ड मेंबर प्रपोर्शनल (MMP) चुनाव प्रणाली लागू है। इस व्यवस्था में मतदाता सीधे प्रधानमंत्री या देश के नेता को नहीं चुनते, बल्कि दो वोट डालते हैं।
पहला वोट अपने इलाके के उम्मीदवार को दिया जाता है
दूसरा वोट अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी को दिया जाता है
हर इलाके में सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार संसद में पहुंचता है। इसके अलावा देशभर में किसी पार्टी को मिले वोटों के अनुपात के हिसाब से उसके दूसरे उम्मीदवारों को भी संसद में जगह मिलती है।
संसद में आमतौर पर 120 सीटें होती हैं। सरकार बनाने के लिए किसी एक पार्टी या पार्टियों के गठबंधन को आधे से ज्यादा सीटें हासिल करनी होती हैं।