नई दिल्ली: मार्केट रेगुलेटर सेबी ने डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो में नॉमिनेशन के लिए एक आसान फ्रेमवर्क का प्रस्ताव दिया है। इसका मकसद निवेशकों के लिए ऑनबोर्डिंग को आसान बनाना और इंडस्ट्री द्वारा बताई गई ऑपरेशनल चुनौतियों को हल करना हैरेगुलेटर ने सुझाव दिया है कि नॉमिनी की जरूरी जानकारी को घटाकर सिर्फ दो फील्ड तक सीमित कर दिया जाए। एक नाम और निवेशक के साथ रिश्ता। वहीं पता, संपर्क विवरण और हिस्सेदारी का प्रतिशत जैसी बाकी सभी जानकारियों को वैकल्पिक बना दिया जाए। इसके लिए जनता से सुझाव मांगे गए हैं।
नॉमिनी चला सकेगा अकाउंट
सेबी के नए नॉमिनेशन नियमों के अनुसार रेगुलेटेड संस्थाएं निवेशकों को एक ऐसी सुविधा देंगी जिससे वे अपने नॉमिनी को यह अधिकार दे सके कि अगर निवेशक किसी वजह से अपना खाता या फोलियो खुद न चला पाए, लेकिन फिर भी उसमें कॉन्ट्रैक्ट करने की कानूनी क्षमता हो, तो नॉमिनी उसकी जगह खाता चला सके।
सेबी ने दिए ये प्रस्ताव
- अब नॉमिनी के लिए केवल नाम और निवेशक से संबंध देना अनिवार्य किया जा सकता है। बाकी जानकारी जैसे PAN, आधार या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर वैकल्पिक हो सकते हैं।
- नए खाते खोलते समय नॉमिनेशन को डिफॉल्ट बनाया जा सकता है, जिससे निवेशकों को अलग से प्रक्रिया नहीं करनी पड़ेगी।
- जिन खातों में नॉमिनेशन नहीं है, उन्हें ईमेल और SMS के जरिए समय-समय पर मैसेज भेजा जाएगा।
- म्यूचुअल फंड में अधिकतम 4 नॉमिनी रखने का प्रस्ताव है। वहीं, जॉइंट होल्डर्स की सीमा 3 ही रहेगी।
- अगर निवेशक शारीरिक रूप से अक्षम है लेकिन मानसिक रूप से सक्षम है, तो ऐसे मामलों में PoA (पावर ऑफ अटॉर्नी) का इस्तेमाल करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है।
मौजूदा नियमों में क्या दिक्कत?
सेबी ने माना कि वर्तमान नियमों में कई चुनौतियां सामने आई हैं। इनमें ये प्रमुख हैं:
- अनुपालन (compliance) की अधिक लागत
- ऑडिट ट्रेल बनाए रखना मुश्किल
- धोखाधड़ी और दुरुपयोग का खतरा
- कानूनी विवाद की संभावना
नए नियमों से क्या बदलेगा?
अगर सेबी के ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो निवेशकों के लिए नॉमिनेशन प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी और खाता खोलना भी आसान होगा। साथ ही इंडस्ट्री के लिए भी ऑपरेशनल बोझ कम हो सकता है। फिलहाल SEBI ने इन प्रस्तावों पर सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी हैं, जिसके बाद अंतिम नियम तय किए जाएंगे।