रियाद/अबू धाबी: होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की धमकियों के बीच खाड़ी में दो ऐसे पाइपलाइन हैं जिनसे दुनिया को तेल और गैस की सप्लाई हो सकती है। एक सऊदी अरब में और एक संयुक्त अरब अमीरात में। ईरान युद्ध के बीच फारस की खाड़ी से दुनिया के बाजारों में बड़ी मात्रा में तेल पहुंचाने का फिलहाल यही एकमात्र तरीका है। इन रास्तों से जहाजों के जरिए नहीं बल्कि पाइपलाइन के जरिए तेल की सप्लाई हो रही है। इसीलिए ये स्थायी समाधान नहीं हैं लेकिन कम से कम ईरान युद्ध के बीच दुनिया में मंडराए बुरे संकट को कम जरूर कर सकते हैं।ये पाइप टैंकर जहाजों से होने वाले तेल के बहाव की जगह नहीं ले सकते, लेकिन इनका इस्तेमाल ही एक और भी बुरे संकट को होने से रोक रहा है। सऊदी अरब खास तौर पर अपनी पाइपलाइन के जरिए जितना हो सके उतना कच्चा तेल लाल सागर के अपने बंदरगाह यानबू तक पंप कर रहा है, जिसे 1980 के दशक की शुरुआत में बनाया गया था। उस वक्त ईरान और इराक के बीच युद्ध चल रहा था जिसकी वजह से फारस की खाड़ी में इसी तरह का खतरा उत्पन्न हो गया था।दुनिया पर सबसे भयानक तेल और गैस संकट
सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको के चीफ एग्जीक्यूटिव अमीन नासिर ने मंगलवार को कहा है कि "हालांकि हमने पहले भी रुकावटों का सामना किया है, लेकिन यह अब तक इस इलाके की तेल और गैस इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ा संकट है।" शिपिंग में रुकावट ने सऊदी अरब की 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' को दुनिया की अर्थव्यवस्था में सबसे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर में से एक बना दिया है। नासिर ने कहा कि सरकारी तेल प्रोड्यूसर को उम्मीद है कि वह कुछ ही दिनों में 746 मील लंबी पाइपलाइन से ज्यादा से ज्यादा 7 मिलियन बैरल तेल भेज पाएगा।इसका मतलब ये हुआ कि करीब 2 मिलियन बैरल तेल सऊदी रिफाइनर को दिया जाता है जिससे हर दिन 5 मिलियन बैरल तेल ग्लोबल मार्केट तक पहुंच सकता है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक यह युद्ध से पहले सऊदी अरब के ज्यादातर क्रूड शिपमेंट के बराबर है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी एक बड़ा टेस्ट है। IEA ने कहा कि पाइप कभी भी लंबे समय तक पूरी क्षमता के साथ नहीं चली है। और इससे पूरी प्रॉब्लम ठीक नहीं होती। इससे अरामको हर दिन 800,000 बैरल पेट्रोलियम प्रोडक्ट स्ट्रेट से भेजता है जिसे रीरूट नहीं किया जा सकता। साथ ही, कुवैत, इराक और बहरीन में तेल फंसा हुआ है। होर्मुज के पानी में माइंस बिछा रहा है ईरान
मंगलवार को CBS ने रिपोर्ट किया है कि ईरान इस पतले पानी के रास्ते में माइनिंग करने की तैयारी कर रहा है। ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका ने 10 ईरानी माइनिंग जहाजों को "पूरी तरह से नष्ट" कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से इराक, बहरीन और कुवैत में तेल प्रोडक्शन रुक गया है। बहरीन की तेल कंपनी बापको ने सोमवार को फोर्स मेज्योर घोषित किया है और ऐसा ही कतर ने भी किया है जो दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत लिक्विफाइड नेचुरल गैस का प्रोडक्शन करता है।
इस हफ्ते तेल की कीमतों में भारी लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। बाजार इस उम्मीद पर प्रतिक्रियाएं दे रहा है कि ईरान पर युद्ध कितने समय तक चलेगा। इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट सोमवार को 117 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। लेकिन फिर इसमें भारी गिरावट आ गई। जबकि मंगलवार को 88.93 डॉलर प्रति बैरल पर यह ट्रेड कर रहा था। आज बुधवार को कच्चे तेल की कीमत 88.75 डॉलर प्रति बैरल है।