
भोपाल। राजधानी सहित प्रदेश के कई शहरों की हाईराइज सोसायटियों में इलेक्ट्रिक वाहनों की असुरक्षित चार्जिंग व्यवस्था बड़े हादसों का कारण बनती जा रही है। हाल ही में रचना टॉवर में लगी आग की घटना ने बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश सोसायटियों में फायर सिस्टम केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, जबकि पार्किंग क्षेत्रों में अस्थायी वायरिंग और घरेलू प्लग से ईवी चार्जिंग लगातार खतरा बढ़ा रही है।
भारत सरकार के ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी के ऊर्जा ऑडिटर ज्ञानेंद्र कुमार सक्सेना के अनुसार, कई लोग ईवी चार्जिंग के लिए घरेलू प्लग और लंबे एक्सटेंशन वायर का उपयोग कर रहे हैं। लगातार लोड पड़ने से वायर गर्म होकर शॉर्ट सर्किट का कारण बनते हैं। बहुमंजिला इमारतों में यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
रचना टॉवर हादसे के बाद सामने आया कि इमारत का फायर सिस्टम पूरी तरह सक्षम नहीं था। फायर फाइटिंग के लिए जरूरी होज पाइप तक उपलब्ध नहीं थे। नगर निगम फायर विभाग ने भी माना कि कई हाईराइज सोसायटियों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि नियमों की अनदेखी करने वाली सोसायटियों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईवी चार्जिंग के लिए अलग और डेडिकेटेड लाइन होना अनिवार्य है। प्रत्येक चार्जिंग प्वाइंट पर एमसीबी, अर्थिंग और सुरक्षित वायरिंग जरूरी है। बिना अर्थिंग और ओवरलोडेड सिस्टम में आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। चार्जिंग के तुरंत बाद वाहन को प्लग से हटाने की सलाह भी दी गई है, क्योंकि बैटरी गर्म रहने पर हादसे की आशंका बनी रहती है।
फायर अलार्म, स्प्रिंकलर, स्मोक सेंसर और फायर फाइटिंग उपकरणों की नियमित जांच नहीं होने से जोखिम और बढ़ रहा है। विशेषज्ञों ने हाईराइज इमारतों में व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने और ईवी चार्जिंग के लिए अलग सुरक्षित जोन बनाने की मांग की है, ताकि भविष्य में बड़े हादसों को रोका जा सके।