रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए बुधवार को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ करीब 770 करोड़ रुपए की डील की है। इसके तहत इम्प्रूव्ड लो लेवल लाइट वेट रडार (LLLR-I) खरीदे जाएंगे।

ये रडार फाइटर जेट के साथ बेहद छोटे ड्रोन का भी पता लगाकर उनकी गतिविधियों को ट्रैक कर सकेंगे। ये रडार हवाई लक्ष्यों की पहचान कर यह भी तय कर सकेंगे कि किस खतरे पर पहले ध्यान देना जरूरी है।

इससे दुश्मन के ड्रोन से निपटने में सेना को मदद मिलेगी। साथ ही, देश की हवाई सुरक्षा मजबूत होगी और भारत में रक्षा उपकरण बनाने को बढ़ावा मिलेगा।


स्वदेशी रक्षा निर्माण को मिलेगा बढ़ावा

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) से करीब 770 करोड़ रुपए के रडार खरीदने का करार देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देगा।

इससे घरेलू रक्षा उद्योग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को भी अवसर मिलने की उम्मीद है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के लक्ष्यों के अनुरूप है।


15 अक्टूबर: 4,106 करोड़ की डिफेंस डील हुई

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना और नौसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 4,106 करोड़ रुपए के दो रक्षा करार किए। इनमें वायुसेना के लिए संचार उपग्रह और नौसेना के लिए पनडुब्बी रोधी टॉरपीडो की खरीद शामिल है।

1. वायुसेना को मिलेगा ₹2,563 करोड़ का संचार उपग्रह

मंत्रालय ने न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के साथ GSAT-7C संचार उपग्रह के लिए 2,563 करोड़ रुपए का करार किया। स्वदेशी रूप से विकसित इस उपग्रह से वायुसेना के विमानों और अन्य संसाधनों के बीच सुरक्षित और बेहतर संचार व्यवस्था मजबूत होगी।

2. नौसेना के लिए ₹1,543 करोड़ के वरुणास्त्र टॉरपीडो

भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ 1,543 करोड़ रुपए का करार किया गया। इसके तहत नौसेना के लिए स्वदेशी वरुणास्त्र हेवी वेट टॉरपीडो खरीदे जाएंगे। इन्हें जहाज से दागकर दुश्मन की पनडुब्बियों को निशाना बनाया जा सकता है। इससे नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता बढ़ेगी।


हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने इंडियन एयरफोर्स को पहले 3 HTT-40 बेसिक ट्रेनर विमान बुधवार को सौंप दिए हैं। पूरी तरह नए पायलटों की ट्रेनिंग शुरू होने में 2 साल तक लग सकते हैं। पहले HTT-40 की डिलीवरी 18 सितंबर को बेंगलुरु में हुई थी।