रचनाकारों ने बांधा समां, कविताओं में दिखे जीवन के विविध रंग
भोपाल। न्यू मिनाल सांस्कृतिक समिति, भोपाल के तत्वावधान में न्यू मिनाल रेजीडेंसी स्थित गणेश पार्क में भावपूर्ण काव्य संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती कांति शुक्ला ने की। काव्य संध्या में 13 रचनाकारों ने प्रेम, परिवार, सामाजिक सरोकार, जीवन-दर्शन और मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत अपनी रचनाओं का पाठ कर साहित्यप्रेमी श्रोताओं को देर रात 12 बजे तक काव्य-रस में सराबोर रखा।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं सरस संचालन सत्य देव ‘सत्य’ ने किया। सुरेश पटवा के संयोजन में आयोजित काव्य संध्या का शुभारंभ श्रीमती सीमा हरि शर्मा की सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात संस्था के पदाधिकारियों ने सभी रचनाकारों का सम्मान किया। डॉक्टर आर. सी. श्रीवास्तव ने अतिथियों, रचनाकारों एवं श्रोताओं का स्वागत किया।
काव्य पाठ की शुरुआत से ही श्रोताओं को विविध भावों और संवेदनाओं से जुड़ी रचनाएं सुनने को मिलीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं श्रीमती कांति शुक्ला ने अपनी भावपूर्ण पंक्तियां “पलकों के आसन पर किया जिन्हें विराजित जीवन भर” प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। हरि वल्लभ शर्मा ने सामाजिक सरोकारों को स्वर देते हुए कहा “किस पर करें भरोसा अब हम, किस पर नहीं करें।” वहीं घनश्याम मैथिल ने जीवन और संवेदना से जुड़ी पंक्तियां “चाहे भले पढ़ो वेदना, हो सके तो लोगों की हरो वेदना” सुनाकर मानवीय संवेदना का पक्ष सामने रखा।
सुरेश पटवा ने अपनी रचना में जीवन की जटिलताओं और अनुभवों को स्वर देते हुए कहा “सच का दामन थाम चलता रहा, झूठ से भी कुछ उधार लिया।” कैलाश मेश्राम ने “तस्वीर तुम्हारी है दिल में” के माध्यम से प्रेम की कोमल अनुभूति को अभिव्यक्त किया। सुरेश पबरा की पंक्तियां “ज़िंदगी में गर कहीं भी यार तुम जो मिल गए, उम्र चाहे जो हो मेरी, मैं जवां हो जाऊंगा” पर श्रोताओं ने खूब दाद दी।
सत्य देव ‘सत्य’ ने माता-पिता के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सुनाया— “आशीष मां-पिता जी का पाता रहा हूं, चरणों में उनके शीश झुकता हूं।” श्रीमती सीमा हरि शर्मा ने “मेरी बिंदिया में प्यार तेरा नजर आता है”, सुरेश सोनपुरे ने “ऊंची इन इमारतों में सवेरा ही सबेरा है”, रुपाली सक्सेना ने “मोहब्बत से जीना सिखाऊंगी आपको, जमाने की बातें बताऊंगी आपको”, अभिषेक जैन ‘अबोध’ ने “आदमी तब तक दिखता तुम्हें भला है”, दिनेश गुप्ता ने “मां के चरणों में मिलेंगे चारों धाम” तथा प्रतिभा प्रकाश ने “मेरी बहू मेरी बेटी” जैसी रचनाओं का पाठ किया।
रचनाकारों की विविधतापूर्ण प्रस्तुतियों ने काव्य संध्या को भावों का सुंदर संगम बना दिया। कहीं प्रेम की कोमल अनुभूतियां थीं तो कहीं परिवार और रिश्तों की आत्मीयता, सामाजिक सरोकारों की चिंता थी तो कहीं जीवन के गहरे अनुभव और मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति। रचनाओं पर श्रोताओं की लगातार मिलती दाद ने वातावरण को देर रात तक जीवंत बनाए रखा।